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Friday, August 7, 2015

The Prophet by Kahlil Gibran - "Work " " काम “

I had been translating  " The Prophet "  a timeless classic by Kahlil Gibran. Sharing with you few gems from that translation in hindi.Today - on "Work" “काम


फिर एक हलधारी ने कहा ,
                     “  मास्टर हमें काम के बारे में बताओ  “

और उसने  कहा ,
                " तुम काम करते हो ताकि पृथ्वी के साथ , और पृथ्वी की आत्मा के साथ चल सको ।

निठल्ले रहने का मतलब है , कि उन बदलती ऋतुओं से अंजान होना , और न कदम मिला पाना  , जीवन कि यात्रा  से जो अति उत्साह और गर्व से अन्नत को आत्म समर्पण कर रही है।

जब तुम काम करते हो , तो तुम उस बांसुरी कि तरह होते हो , जिसके दिल पर , समय अपना मधुर संगीत छेड़ता है।

क्या तुम वोह बांसुरी  होना चाहोगे , जो मूक और खामोश रहती है , जब कि सर्वस्व एक सुर में गा रहा है ।

हमेशा तुम से कहा गया है कि , काम एक अभिशाप है ,और मेहनत दुर्भाग्य ।

लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ , कि जब तुम काम करते हो , तो धरती को वो दिवास्वपन पूरा करते हो , जिसकी जिम्मेवारी ,आपको उस स्वपन के जनम के साथ ही दे दी गयी थी ।

जब आप काम करते हो, तो असल में आप जीवन से प्यार करते हो ।
कर्म से जीवन को प्यार करते हुए तुम जीवन के गुप्त रहस्यों के करीब होते हो।

तुम्हें यह भी कहा गया है कि जीवन एक अंधकार है , और अपनी थकावट में, तुम भीहारे हुए व्यक्ति कि हाँ में हाँ मिला देते हो ।...

और

सारा जीवन अंधकार है ,अगर उत्साह न हो है ।
सारा उत्साह अंधा है , अगर ज्ञान न हो ।
सारा ज्ञान खोखला है ,अगर कर्म न हो ।

सारा कर्म खोखला है , अगर प्यार से न हो ।…………

Monday, August 3, 2015

The Prophet by Kahlil Gibran - Friendship" " दोस्ती "



 I had been translating  " The Prophet "  a timeless classic by Kahlil Gibran. Sharing with you few gems from that  translation in hindi.Today  - on  " Friendship" " दोस्ती  "


और एक युवक ने कहा ,
                     “ हमें दोस्ती के बारे में बताओ “
और उसने कहा ,
             तुम्हारा दोस्त तुम्हारी जरूरतों का हल है
वह तुम्हारी वो  फसल है जिसे तुम प्रेम से बीजते हो और धन्यवादता से काटते हो ।
तुम अपनी तड़प के साथ उसके पास आते हो और उसमें शांति खोजते हो ।
जब भी तुम्हारा दोस्त तुमसे बोलता है , तुम न तो न कहते हुए डरते हो , न ही ,हाँ को रोकते हो ।
और जब वो कुछ नहीं बोलता, तुम्हारा दिल सतत उसके मौन को सुनता है ।
दोस्ती में बिना बोले , सभी विचार, सभी इच्छायेँ, सभी आशाएँ जन्मती हैं , और बांटी जाती हैं ,उस आनन्द के साथ जिसका कोई परावार नहीं ।
और दोस्ती में कोई  उदेश्य नहीं  होना चाहिए , सिवा इस के की आत्मा की गहराई बढ़े ।
क्योंकि वो प्रेम जो सिर्फ चाहता है , प्रेम के रहस्य के सिवा , वो प्रेम नहीं , सिर्फ एक फेंका हुआ जाल है , जिसमें सिर्फ व्यर्थ ही फसेगा ।
और अपने दोस्त के लिए सर्वोत्तम रखो ।
क्या दोस्त है तुम्हारा , जिसे तुम समय काटने की लिए ढूंढते हो।
उसको ढूंढो समय जीने के लिए ...............


Saturday, August 1, 2015

The Prophet by Kahlil Gibran - "Teaching " " शिक्षा "

 I had been translating  " The Prophet "  a timeless classic by Kahlil Gibran. Sharing with you few gems from that  translation in hindi.Today  - on  "Teaching" “शिक्षा

 फिर एक शिक्षक ने कहा ,
                     “ मास्टर हमें शिक्षा के बारे में बताओ “
कोई व्यक्ति तुम्हें वो ही प्रकट करेगा , जो तुम्हारे ज्ञान की अर्ध सुप्त अवस्था की भोर में पड़ा है ।
वो अध्यापक जो अपने शिष्यों के साथ मंदिर की छाया में चलता है , वो अपनी बुद्धिमता नहीं , बल्कि अपनी श्रद्धा और प्रेम बांटता है ।
अगर वो सचमुच विवेकवान है , वो तुम्हें अपने ज्ञान के  भँडार में पर्वेश देने की बजाए , तुम्हें , तुम्हारे मन की दहलीज़ तक अगुआई करता है ।
एक खगोल शास्त्री तुम्हें आकाश के बारे में अपनी समझ बता सकता है ,लेकिन अपनी समझ नहीं दे सकता ।
संगीतकार अपने संगीत की लय तुम्हें गा कर सुना सकता है ,जो सब आकाश में है । लेकिन वो न ही तुम्हें कान दे सकता है , न ही वह आवाज़ दे सकता है , न ही वोह आवाज़ दे सकता है , जहां से वह लय गूँजती है ।
वह जो अंक विज्ञान का ज्ञाता है , वह तुम्हें बाट और माप की दुनिया के बारे में बता सकता है , परंतु वहाँ ले जा नहीं सकता ।
क्योंकि एक आदमी की दृष्टि दूसरे आदमी को पंख नहीं दे सकती ।
और जैसे परमात्मा आप सब अकेले  अकेले का ध्यान रखता है । उसी  तरह सभी को अकेले अकेले परमात्मा  का ज्ञान  और धरती की समझ होनी चाहिए ।