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Saturday, August 1, 2015

The Prophet by Kahlil Gibran - "Teaching " " शिक्षा "

 I had been translating  " The Prophet "  a timeless classic by Kahlil Gibran. Sharing with you few gems from that  translation in hindi.Today  - on  "Teaching" “शिक्षा

 फिर एक शिक्षक ने कहा ,
                     “ मास्टर हमें शिक्षा के बारे में बताओ “
कोई व्यक्ति तुम्हें वो ही प्रकट करेगा , जो तुम्हारे ज्ञान की अर्ध सुप्त अवस्था की भोर में पड़ा है ।
वो अध्यापक जो अपने शिष्यों के साथ मंदिर की छाया में चलता है , वो अपनी बुद्धिमता नहीं , बल्कि अपनी श्रद्धा और प्रेम बांटता है ।
अगर वो सचमुच विवेकवान है , वो तुम्हें अपने ज्ञान के  भँडार में पर्वेश देने की बजाए , तुम्हें , तुम्हारे मन की दहलीज़ तक अगुआई करता है ।
एक खगोल शास्त्री तुम्हें आकाश के बारे में अपनी समझ बता सकता है ,लेकिन अपनी समझ नहीं दे सकता ।
संगीतकार अपने संगीत की लय तुम्हें गा कर सुना सकता है ,जो सब आकाश में है । लेकिन वो न ही तुम्हें कान दे सकता है , न ही वह आवाज़ दे सकता है , न ही वोह आवाज़ दे सकता है , जहां से वह लय गूँजती है ।
वह जो अंक विज्ञान का ज्ञाता है , वह तुम्हें बाट और माप की दुनिया के बारे में बता सकता है , परंतु वहाँ ले जा नहीं सकता ।
क्योंकि एक आदमी की दृष्टि दूसरे आदमी को पंख नहीं दे सकती ।
और जैसे परमात्मा आप सब अकेले  अकेले का ध्यान रखता है । उसी  तरह सभी को अकेले अकेले परमात्मा  का ज्ञान  और धरती की समझ होनी चाहिए ।




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