I had been translating " The Prophet " a timeless classic by Kahlil Gibran , published in early twentieth century. I am sharing with you few gems from that translation in Hindi.Today i am sharing his saying on "Children"
और एक औरत जिसने एक बच्चे को छाती से लगा रखा था , बोली
" हमें बच्चों के बारे में बताओ "
उसने कहा
तुम्हारे बच्चे , तुम्हारे नहीं हैं
वो जीवन की अपनी अभिलाषा के पुत्तर और पुत्तरीयाँ हैं
वो तुम्हारे दुुआरा आते हैं , तुम में से नहीं।
आप उन्हें अपना प्यार दे सकते हो ,
अपने विचार नहीं.
उनके अपने विचार हो सकते हैं।
आप उनके शरीरों के रखवाले हो सकते हो ,
लेकिन उनकी आत्माओं के नहीं।
क्योंकि
उनकी आत्माएं भविष्य में निवास करती हैं।
जहाँ तुम कभी घुस नहीं सकते ,
यहाँ तक की अपने स्वप्नों में भी नहीं। …
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