I
had been translating " The Prophet " a timeless classic
by Kahlil Gibran. Sharing with you few gems from that translation in
hindi.Today - on "Work" “काम “
फिर एक हलधारी ने कहा ,
“ मास्टर हमें काम के बारे में बताओ “
और उसने कहा ,
" तुम काम करते हो ताकि पृथ्वी के
साथ , और पृथ्वी की आत्मा के साथ चल सको ।
निठल्ले रहने का मतलब है , कि उन बदलती ऋतुओं से अंजान होना , और न कदम मिला पाना , जीवन कि यात्रा से जो अति उत्साह
और गर्व से अन्नत को आत्म समर्पण कर रही है।
जब तुम काम करते हो , तो तुम उस बांसुरी कि तरह होते हो , जिसके दिल पर , समय अपना मधुर संगीत छेड़ता है।
क्या तुम वोह बांसुरी होना चाहोगे , जो मूक और खामोश रहती है , जब कि सर्वस्व एक सुर में
गा रहा है ।
हमेशा तुम से कहा गया है कि , काम एक अभिशाप है ,और
मेहनत दुर्भाग्य ।
लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ , कि जब तुम काम करते हो , तो धरती को वो दिवास्वपन पूरा करते हो , जिसकी
जिम्मेवारी ,आपको उस स्वपन के जनम के साथ ही दे दी गयी थी ।
जब आप काम करते हो, तो असल में आप जीवन से प्यार करते हो ।
कर्म से जीवन को प्यार करते
हुए तुम जीवन के गुप्त रहस्यों के करीब होते हो।
तुम्हें यह भी कहा गया है कि
जीवन एक अंधकार है , और अपनी
थकावट में, तुम भी, हारे हुए व्यक्ति कि हाँ में हाँ मिला
देते हो ।...
और
सारा जीवन अंधकार है ,अगर उत्साह न हो है ।
सारा उत्साह अंधा है , अगर ज्ञान न हो ।
सारा ज्ञान खोखला है ,अगर कर्म न हो ।
सारा कर्म खोखला है , अगर प्यार
से न हो ।…………